बांग्लादेश के स्कूलों में शारीरिक दंड के बढ़ते मामलों को देखते हुए सोमवार को इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया। साथ ही शिक्षकों द्वारा बच्चों को अमानवीय दंड [जैसे, बेंत मारना और पिटाई] देने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, 'अक्सर बच्चों द्वारा अनुशासन का पालन न करने और पढ़ाई पर ध्यान न देने पर कुछ शिक्षक छात्रों को अमानवीय दंड देते हैं। ऐसे शिक्षकों की पहचान स्कूल की प्रबंधन समिति करेगी।'
आदेश के मुताबिक शिक्षकों को छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद करनी चाहिए, ताकि वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें। शारीरिक दंड के कारण छात्रों के विकास में बाधा आती है। शिक्षकों द्वारा इस आदेश का उल्लंघन करना 'दुर्व्यवहार' माना जाएगा। उन पर बाल अधिनियम के तहत कानूनी या विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश में दस में से नौ बच्चों को स्कूलों में शारीरिक दंड दिया जाता है। इस साल मार्च में कलर पेंसिल भूल आने के कारण शिक्षक ने छात्रों को इतनी बेहरमी से पीटा कि उन्हें अस्पताल भेजना पड़ा। इन छात्रों की उम्र सात से 11 साल थी।