पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को सिंध हाईकोर्ट ने अदालत में उपस्थित नहीं होने के लिए मंगलवार को भगोड़ा घोषित कर दिया। राजनीति में वापस आने की उनकी योजना को इससे धक्का पहुंच सकता है। सिंध हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सरमद जलाल उस्मानी की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने उसके समक्ष उपस्थित नहीं होने के लिए मुशर्रफ के खिलाफ यह आदेश जारी किया। अवामी हिमायत तहरीक के मौलवी इकबाल हैदर की याचिका पर आदेश जारी किया गया जो संविधान के साथ छेड़छाड़ और देशद्रोह करने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई चाहते थे।
स्वनिर्वासन में रह रहे मुशर्रफ बुधवार को 67 वर्ष के हो जाएंगे। हैदर एक वकील भी हैं और उन्होंने मुशर्रफ एवं वकील शरीफुद्दीन पीरजादा एवं अटार्नी जनरल मलिक अब्दुल कयूम सहित उनके सहयोगियों के खिलाफ संविधान के साथ छेड़छाड़ एवं देशद्रोह करने के लिए कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अदालत से अपील की है कि मुशर्रफ के खिलाफ षड्यंत्र याचिका दायर की जाए। अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ कई नोटिस जारी किए लेकिन वह अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। हैदर ने कहा कि मैंने दूसरी याचिका में अदालत से आग्रह किया कि ब्रिटेन के अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करने में मेरा सहयोग किया जाए लेकिन इस याचिका को समर्थन नहीं मिला। उन्होंने कहा कि फिर मैंने अदालत से मुशर्रफ को भगोड़ा घोषित करने की मांग की क्योंकि ब्रिटेन के अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित कराने का खर्च मैं वहन नहीं कर सकता था।
पाकिस्तान की विभिन्न अदालतों में मुशर्रफ के खिलाफ कई मामले लंबित हैं और संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में दिसंबर 2007 में पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के लिए उनके शासन को ही जिम्मेदार ठहराया था।
पीपीपी के नेतृत्व में मार्च 2008 में गठबंधन सरकार बनने के बाद राष्ट्रपति पद से हटने को बाध्य किए गए मुशर्रफ ने अप्रैल 2009 में देश छोड़ दिया था। बहरहाल पूर्व सैन्य प्रशासक पाकिस्तानी राजनीति में वापसी करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। मुशर्रफ फिलहाल लंदन में रह रहे हैं और कहते रहे हैं कि वह निर्वासन में नहीं हैं और जल्द ही वह पाकिस्तान लौटेंगे।